Sunday, September 23, 2018

लू हिंसा ये नहीं होती कि कोई आप पर

शियाई सुरक्षा पर काम कर रही थिंक टैंक सिक्यॉरिटी रिस्क ऑफ़ एशिया के प्रमुख राहुल भोसले ने इस मसले पर आइरिश टाइम्स से कहा है कि मालदीव की तरफ़ से भारत को हेलिकॉप्टर ले जाने के लिए कहना भारत की सैन्य और राजनयिक नीतियों के लिए तगड़ा झटका है.
उन्होंने कहा कि इससे साफ़ पता चलता है कि इस इलाक़े में भारत चीन का सामना नहीं कर पा रहा है. मार्च 2015 में मोदी को मालदीव जाना था, लेकिन भारत समर्थक नेता मोहम्मद नाशीद को जेल में डाले जाने के बाद इस दौरे को रद्द कर दिया गया था.
चीन अगर मालदीव में अपना पैर जमा लेता है तो वो भौगोलिक रूप से भारत के और क़रीब आ जाएगा. इसके साथ ही मालदीव अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के पास है और भारत तेल का आयात इसी मार्ग से करता है. अगर मालदीव में चीन में नेवल बेस बना लेता है तो भारत की सुरक्षा के लिहाज से ख़तरा बढ़ेगा.
मालदीव के चुनावी नतीजे का भारत ने भी स्वागत किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत ने बिना आधिकारिक घोषणा के ही स्वागत किया है. भारत ने कहा है, ''हम मालदीव में सफलतापूर्वक आयोजित किए गए तीसरे राष्ट्रपति चुनाव का स्वागत करते हैं. शुरुआती सूचना के अनुसार चुनाव में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को जीत मिली है. हम उन्हें बधाई देते हैं और उम्मीद है कि चुनाव आयोग आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा करेगा.''क अंग्रेज़ नाटककार विलियम कंग्रीव ने 1697 में लिखे अपने नाटक ' द मोर्निंग ब्राइड' में लिखा था, ''हेवेन हैज़ नो रेज लाइक लव टू हैटरेड टर्न्ड, नॉर हेल अ फ़्यूरी लाइक अ वुमन स्कॉर्न्ड.' लब्बोलुआब ये कि एक तिरस्कृत औरत का ग़ुस्सा जहन्नुम की सभी विभीषिकाओं से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है.
कंग्रीव की ये पंक्तियाँ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की दूसरी तलाकशुदा पत्नी रेहाम ख़ान पर पूरी तरह लागू होती हैं जिनकी हाल ही में प्रकाशित आत्मकथा ने भारत, पाकिस्तान और ब्रिटेन हर जगह तहलका मचा दिया है.
रेहाम ख़ान की कहानी शुरू होती है लीबिया से जहाँ  में उनका जन्म एक पाकिस्तानी ईएनटी सर्जन नय्यर रमज़ान के घर हुआ था. अपने पिता के बारे में रेहाम की सबसे मधुर याद ये है कि उनकी माँ को हमेशा 'डार्लिंग' कहकर पुकारते थे. हाम बताती हैं, "हम तो अभिभावकों को समझते नहीं कि वो इंसान भी हो सकते हैं या रोमांटिक भी हो सकते हैं. काफ़ी दिनों तक तो हम समझ ही नहीं पाए कि वो कह क्या रहे हैं. हमारे लिए थोड़ा 'शॉकिंग' था उन्हें 'डार्लिंग' कहकर पुकारना. न सिर्फ़ ये वो जब भी घर में घुसते थे तो सबसे पहले मेरी माँ का चुंबन लेते थे."
"पाकिस्तानी संस्कृति के लिए ये थोड़ी अजीब बात थी जहाँ सार्वजनिक रूप से भावनाओं के इज़हार करने को अच्छा नहीं समझा जाता. मैं इसलिए भी ये बताना चाहती हूँ कि पाकिस्तान में मैंने नोट किया है, शायद भारत में भी ऐसा ही होता हो कि लोग दूसरों की बीवियों से तो खिलखिलाकर बात करते हैं, लेकिन अपनी बीवी को ज़्यादा तवज्जो नहीं देते."
किशोरावस्था में रेहाम काफ़ी मुखर थीं और कॉलेज में लड़कियों के समूह को उन विषयों की जानकारी देती थीं जिनके बारे में उन्हें घर पर बिल्कुल भी नहीं बताया जाता. तीजा ये हुआ कि उनके साथियों ने उनका नाम 'मोर' रख दिया जिसका पश्तो में अर्थ होता है, माँ.
रेहाम याद करती हैं, "मुझे बहुत परिपक्व समझा जाता था, परिवार में भी और दोस्तों में भी. मैं वो रोल करती थी जिसको आजकल 'एगनी आंट' कहा जाता है. मैं अक्सर लड़कियों को जमा कर उनकी मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक समस्याओं पर भाषण देती थीं और वो भी बिना खिलखिलाए."
"मुझे याद है कि कक्षा नौ में अपनी सहेलियों के अनुरोध पर मैं एक कॉन्डोम लेकर अपने स्कूल पहुंच गई थी. होता ये था कि मेरे पिता अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए मुफ़्त मेडिकल कैंप लगाया करते थे और उनकी अलमारी में कॉन्डोम के बड़े-बड़े कार्टन रखे होते है. बचपन में मुझे याद है कि हम उन्हें गुब्बारों की तरह फुलाया करते थे, बिना ये जाने कि उनका असली इस्तेमाल क्या है."
"बड़ी अजीब बात है कि हमारे समाज में लड़कियों की 17-18 साल की उम्र में शादी तो कर दी जाती है, लेकिन उन्हें ये नहीं बताया जाता कि उनके साथ अब होना क्या है. उन्हें सेक्स, गर्भनिरोध या रिश्तों के बारे में कभी बताया ही नहीं जाता. मैं लोगों की नक़ल बहुत अच्छी कर लेती थी. बेनज़ीर भुट्टो का भाषण जब मैं हूबहू वैसा ही सुनाती थी तो लड़कियों का मजमा लग जाता था. जब मैंने ये बात अपनी किताब में लिखी तो मेरी बेटियों ने मेरा मज़ाक उड़ाया कि हाय अल्लाह आपने ये बातें तक किताब में लिख डालीं."
सिर्फ़ 19 साल की उम्र में उनसे  साल बड़े, उनकी बुआ के बेटे एजाज़ रहमान ने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिसे उनके माता-पिता ने स्वीकार कर लिया. लेकिन पहले दिन से ही ये शादी चली नहीं और रेहाम को अक्सर घरेलू हिंसा का शिकार बनना पड़ा.
रेहाम बताती हैं कि ऐसा नहीं था कि उनके पहले पति उन्हें एक आदर्श और निपुण पत्नी बनाना चाहते थे. असल में उनकी मंशा थी उन्हें हमेशा अपने क़ाबू में रखना.

Monday, September 10, 2018

Scientology will «aus dem Untergrund-Dasein raus»

Der oberste Basler Scientologe Patrick Schnidrig erklärt im Video was es mit dem Scientology-Gebäude an der Burgfelderstrasse auf sich hat.
Der oberste Basler Scientologe Patrick Schnidrig erklärt im Video was es mit dem Scientology-Gebäude an der Burgfelderstrasse auf sich hat.
«Man kann immer etwas tun», steht auf einem Plakat am Stand der Scientology auf dem Barfüsserplatz. Und die Basler Scientologen kamen offenbar zum Schluss, dass für sie das gleiche gilt und in Basel eine forcierte Öffentlichkeitsarbeit nötig ist.
Also findet auf dem Barfi die nächsten zwei Tage eine grosse Informationsveranstaltung statt, anlässlich des 40-jährigen Bestehens von Scientology Schweiz. Die Zelte touren durch verschiedene Schweizer Städte, darin präsentieren sich jeweils die Verantwortlichen vor Ort.
In Basel sind an der morgendlichen Medienkonferenz neben Jürg Stettler (Mediensprecher Schweiz), Patrick Schnidrig (Präsident «Scientology Kirche Basel») und Rolf Moll (Öffentlichkeitsbeauftragter Scientology Basel) anwesend. Ausserdem stellt sich das «einfache Mitglied» (Zitat Stettler) Manuela Bermeitinger vor, sie ist für die Nachbarschaftskontakte in den Quartieren zuständig.

500 Scientologen im Raum Basel

Man habe in Umfragen herausgefunden, dass ein grosses Bedürfnis nach Transparenz und Information über die Scientology Kirche bestehe, erklärt Stettler. «Deshalb organisieren wir diese Veranstaltungen und geben eine neue Broschüre heraus.» So veröffentlichte Stettler nach eigenen Angaben erstmals Zahlen zu den Anhängern und festen Mitgliedern über die die Organisation in der Schweiz verfügt. Demnach sollen sich gesamtschweizerisch rund 5000 Menschen als Scientologen bezeichnen, betreut würden diese von über 300 hauptamtlichen Mitgliedern, sagt Stettler.
«Im Raum Basel verfügen wir über etwa 70 hauptamtliche Mitglieder, die sich um 500 Mitglieder kümmern», ergänzt Schnidrig von Scientology Basel die nationalen Zahlen. Aus der Medienmitteilung ist zu entnehmen, dass inbesondere im Raum Basel die Zahl hauptamtlicher Mitglieder in den letzten Monaten erheblich erhöht worden sei.

Scientology Basel auf Expansionskurs

Die forcierte Öffentlichkeitsarbeit geht in Basel also auch mit einem personellen Expansionskurs einher. Zudem ist seit längerem die Rede davon, dass sich die Scientologen in Basel an der Burgfelderstrasse 211 einen «Tempel» bauen wollen. Schnidrig will im Interview (siehe Video) jedoch nichts von dieser Bezeichnung wissen. «Wir bauen das Gebäude an der Burgfelderstrasse zu unserer Niederlassung um. Es wird dort vor allem Büroräume haben, aber auch einen Andachtsraum und Platz für Ausstellungen.»
Eröffnet werden soll der Basler Sitz, der intern auch «Ideal Org» genannt wird, im ersten Halbjahr 2015. «Es geht natürlich auch darum, Präsenz zu markieren», gesteht Schnidrig ein. Hauptanliegen sei es jedoch, einen Ort zu schaffen, an dem sich Interessierte über Scientology informieren können. Der Umbau werde einen «mittleren, einstelligen Millionenbetrag» kosten.
Der neue, offensive Auftritt der Basler Scientologen hat bereits die Politik auf den Plan gerufen. Am Freitag hat die BastA!-Grossrätin Brigitta Gerber eine schriftliche Anfrage (siehe Rückseite dieses Artikels) eingereicht. Gerber stört sich inbesondere daran, dass man der Scientology ausgerechnet während der Art Basel einen derart prominenten Auftritt mitten in der Stadt ermöglicht.
Auch bei sich selbst orten die Scientologen Handlungsbedarf. Das Ergebnis ist eine forcierte Öffentlichkeitsarbeit. (Bild: Livio Marc Stoeckli)

Friday, September 7, 2018

महिलाओं पर आईएस के अत्याचार

इन तंबूओं में अपने तीन बच्चों के साथ रहने वाली बहार दाऊद में कहती हैं, "मैं कभी-कभी 30 बार बेहोश हो जाती थी." यह कहने के थोड़ी देर बाद ही वो ज़मीन पर गिर जाती हैं.
7,000 अन्य यज़ीदी महिलाओं की तरह बहार को आईएस हमलावरों ने ग़ुलाम बना लिया था और उनके साथ बहुत क्रूरता की थी. माना जाता है कि आज भी क़रीब तीन हज़ार महिलाएं आईएस की ग़ुलामी में हैं.
उनके बच्चे उनके पीटे जाने का दाग़ दिखाते हैं.
वो कहती हैं, "ये बच्चे आज भी अपने पिता और भाई के बारे में पूछते रहते हैं." इस दौरान उनकी बेटी रमज़्या अपनी मां को ज़ोर से पकड़ लेती है.
"हमें पिछले दो साल से उनके बारे में कुछ नहीं पता."
इस परंपरागत परिवार में उनकी देखभाल के लिए कोई पुरुष मौजूद नहीं है. 33 वर्षीय मां और उनके बच्चे यहां यज़ीदियों की सहायता में जुटी जर्मन एजेंसी की सहायता से एक स्थानीय यज़ीदी परिवार के अनाथालय में रह रहे हैं.
हज़ारों की संख्या में यज़ीदी अब इराक के उत्तरी कुर्दिस्तान इलाके में फैले विस्थापितों के शिविर में रह रहे हैं.
यज़ीदी कैंपों में आज भी कार्यरत उन कुछ अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) में से एक ब्रिटिश चैरिटी वार चाइल्ड के क्रिस फ़ेल्प्स कहते हैं, "यज़ीदी मानते हैं कि उनके पड़ोसियों ने उन्हें धोखा दिया और उनकी सरकार ने उन्हें भुला दिया और सहायता का प्रावधान घटता जा रहा है." ग़दाद में केंद्र सरकार और उत्तरी इराक के कुर्द प्रशासन के बीच विवादों ने कुर्द और अरब समेत उन इलाकों में राहत कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था को और मुश्किल बना दिया है.
वहीं बच्चों के साथ गेम खेल रहे एक शिक्षक से मैंने पूछा, "आपका क्या सपना है."
उन्होंने बिना रुके कहा, "हम चाहते हैं कि सहायता के लिए यहां और भी एजेंसियां आएं और हमारी मदद करें. अगर वो यहां नहीं आतीं तो दुनिया को हमें यहां से बाहर निकलने में मदद करनी चाहिए."
यज़ीदी धर्म विश्व की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में से एक है. पूरी दुनिया में 10 लाख से भी कम यज़ीदी हैं और इनमें से अधिकांश इराक में रहते हैं.
उनके विश्वास, संस्कृति और मान्यताओं को ख़त्म करने के लिए किए गए आईएस के हमलों को संयुक्त राष्ट्र ने नरसंहार की संज्ञा दी है.
आईएस हमलों में बचे यज़ीदियों के सबसे बड़े मंदिरों में से एक के पुजारी शेख इस्माइल बहरी कहते हैं, "दुनिया के सभी देशों को हमारी स्थिति देखनी चाहिए. हमने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है. हमें सुरक्षा और मदद की ज़रूरत है."
यज़ीदियों की दुर्दशा से पिघले ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी समेत कुछ देशों ने सीमित संख्या में उन्हें अपने यहां शरण देने का मन बनाया है, खास कर उन महिलाओं को जो आईएस की क्रूरता का शिकार हुई हैं.
बीबीसी रेडियो की प्रेज़ेंटर रैचेल ब्लैंड की बुधवार सुबह मौत हो गई. वे पिछले दो साल से ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं.
रैचेल के परिजनों ने उनकी मौत की पुष्टि की है. 40 वर्षीय रैचेल बीबीसी के रेडियो 5 लाइव की जानी-मानी प्रेज़ेंटर थीं.
उन्होंने कैंसर से जुड़ा एक पॉडकास्ट 'यू मी एंड द बिग सी' को होस्ट भी किया था. उनके इस कार्यक्रम को काफ़ी सराहा गया था.
इसके साथ ही रैचेल पिछले दो साल से अपना एक ब्लॉग भी चला रही थीं जिसमें वो कैंसर से ख़ुद की लड़ाई के बारे में लिखा करती थीं. उनके इस ब्लॉग को अवॉर्ड भी मिल चुका है.
रैचेल की मौत का समाचार देते हुए उनके पति स्टीव ने कहा, ''वो एक बेहतरीन और टैलेंटेड ब्रॉडकास्टर थीं. इसके साथ ही वो बहुत प्यार करने वाली बेटी, बहन, आंटी, पत्नी और इन सबसे बढ़कर फ़्रेडी (उनका बेटा) के लिए बेइंतेहा प्यार करने वाली मां थीं.''

Tuesday, September 4, 2018

कश्मीर : सौतेली मां ने करवाया गैंगरेप, भाई और दोस्तों ने आंखें निकालीं, तेज़ाब से जलाया भी

: कश्मीर के बारामूला में रिश्तों को शर्मसार करती एक वारदात सामने आई है, जिसमें नौ साल की एक बच्ची के साथ उसी की सौतेली मां ने अपने बेटे और उसके दोस्तों को उकसाकर गैंगरेप करवाया, उसकी आंखों को चाकू से निकाला गया, और फिर उसके शरीर को तेज़ाब से जलाकर उरी स्थित घर के पास जंगल में फिंकवा दिया.

दिल को दहला देने वाली इस वारदात की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि बच्ची की सौतेली मां, उसके 14-वर्षीय सौतेले भाई तथा तीन अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस इसे 'ओपन एंड शट' केस बता रही है. पिछले रविवार को बच्ची का शव जंगल से बरामद किया गया था, जो सड़ना शुरू कर चुका था.
बारामूला के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मीर इम्तियाज़ हुसैन ने बताया, "हमने तुरंत ही तफ्तीश शुरू कर दी थी..." हत्या की जांच के लिए स्पेशल टीम गठित कर दी गई थी, जिसने परिवार के भीतर ही हसद और बदले की भयावह कहानी को उजागर किया.मीर इम्तियाज़ हुसैन ने बताया, "पता चला था कि बच्ची की सौतेली मां को अपने शौहर की बाहर कहीं रहने वाली पत्नी, और उसके बच्चों से नाराज़गी थी..."

पूछताछ के दौरान बच्ची की सौतेली मां ने कथित रूप से बताया कि उसका शौहर अपनी दूसरी बीवी के साथ ज़्यादा वक्त बिताता था, और अपने सभी बच्चों में सबसे ज़्यादा प्यार भी वह इस नौ-वर्षीय बच्ची से करता था. पुलिस के मुताबिक, इसी बात की वजह से परिवार में तनाव बढ़ता रहा.
मीर इम्तियाज़ हुसैन ने बताया, "महिला ने सौतेली बेटी को मार डालने की साज़िश रची... वह उसे पास ही के जंगल में ले गई, जहां उसने अपने 14-वर्षीय बेटे से बच्ची के साथ बलात्कार करने के लिए कहा..." पुलिस अधिकारी के अनुसार, "सौतेली मां के उकसाने पर ही बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया, और वह सारा समय वहां खुद भी मौजूद थी..."लिस अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद सौतेली मां ने बच्ची का गला घोंट दिया, और उसके बेटे ने कुल्हाड़ी से उसके सिर पर वार किया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई.

मीर इम्तियाज़ हुसैन ने बताया, "इसके बाद आरोपियों में से एक घर लौटा, और एक बोतल में तेज़ाब लेकर आया... 19-वर्षीय लड़के ने तेज़धार चाकू की मदद से बच्ची की आंखें निकालीं, और फिर शरीर पर तेज़ाब डाल दिया..."
महिला के बेटे के दोस्तों ने बच्ची के शव को झाड़ियों में फेंक दिया, और फिर उसे पत्तों-टहनियों से ढक दिया. पुलिस अधिकारी ने बताया, "आरोपियों द्वारा पूछताछ में दी गई जानकारी के आधार पर अपराध में इस्तेमाल किए गए कुल्हाड़ी और चाकू बरामद कर लिए गए हैं..." इसके अलावा तेज़ाब से भरा प्लास्टिक का एक केन भी मिला है.नई दिल्ली: दिल्ली के कई इलाकों में बुधवा

रिश के फिर से 8 या 9 सितंबर से छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बढ़ने की उम्मीद है. गुजरात और महाराष्ट्र के अधिकांश भागों में इस सप्ताह मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा. हालांकि विदर्भ और कोंकण गोवा क्षेत्र में एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा की संभावना बनी रहेगी. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में पांच सितंबर तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है, जबकि छह सितंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश में व्यापक कमी आ जाएगी. बिहार और झारखंड में कई जगहों पर मध्यम और एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती हैर सुबह को तेज़ बारिश देखने को मिली. दिल्ली के शांतिपथ, मोती बाग तथा दिल्ली छावनी इलाकों में सुबह खूब बारिश हुई. जिसकी वजह से कई जगह लोगों को जाम का सामना करना पड़ा. बता दें कि मंगलवार को भी दिल्ली एनसीआर में भारी बारिश देखने को मिली. वहीं, उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त संजय कुमार ने मौसम विभाग (लखनऊ) द्वारा जारी की गई 6 सितंबर तक भारी बरसात की चेतावनी के मद्देनज़र सभी जिला मजिस्ट्रेटों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं.
मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में राज्य के 20 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मध्य भाग और उससे लगे उत्तरी मध्य प्रदेश में ऊपरी चक्रवाती हवाओं का घेरा बनने के कारण राज्य में बारिश का दौर जारी है. वहीं, बिहार की राजधानी पटना और इसके आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को मौसम साफ है. मौसम विभाग ने शाम तक हल्के बादल छाने के आसार जताए हैं. मौसम पूर्वानुमानकर्ता स्काइमेट की ओर से सोमवार को जारी साप्ताहिक अनुमान के अनुसार, इस सप्ताह देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्से के अधिकांश राज्यों में मानसून सक्रिय रहेगा. स्काइमेट के अनुसार, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में पांच सितंबर तक कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी. कुछ जगहों पर भारी वर्षा भी हो सकती है. पांच सितंबर के बाद दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में बारिश कम हो जाएगी, लेकिन 7 सितंबर तक हल्की बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी. मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 7 सितंबर के बाद उत्तर भारत के अधिकांश भागों में मौसम मुख्यत: शुष्क हो जाएगा. जम्मू एवं कश्मीर में अगले दो-तीन दिनों के दौरान हल्की बारिश हो सकती है. स्काइमेट ने कहा कि मध्य भारत में मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से और छत्तीसगढ़ के कई जगहों पर पांच सितंबर तक मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है. उसके बाद बारिश में कमी आएगी और अगले कुछ दिनों तक महज हल्की वर्षा ही देखने को मिलेगी.

Saturday, September 1, 2018

动画视图:过度捕捞的影响

度捕捞所造成的影响是灾难性的。科学家们估计,自20世纪50年代开始产业化捕鱼船队日益盛行以来,全球渔业资源基础已经锐减到不足10%。

海洋生物普查显示,包括鳕鱼,鲨鱼,大比目鱼,石斑鱼,金枪鱼和箭鱼在内的大型掠食性鱼类遭受的影响最为严重,其数量较 年减少了90%。

设计师山姆•斯洛弗的新作品《过度捕捞的影响》试图用动画数据互动的方式表现这百年中的变化及其影响。动画以美国哥伦比亚大学的数据为基础,展示​​了人类的捕捞活动对海洋食物链产生的影响,即大型鱼类数目明显下周,一家研究流离失所问题的国际知名机构发布报告称,过去五年中,洪涝、暴雨、地震等自然灾害导致很多居民失去家园,超过三分之一集中在中国。

据总部设在日内瓦的境内流离失所监控中心( )计算,  年间,中国因自然灾害流离失所的人数居于世界首位,约 万,占世界总数(1. 亿)的35%。

这个数字几乎是排在第二位的印度的两倍。本周发布的报告称,这一问题在亚洲尤为严重,过去五年亚洲流离失所人数占世界总数的81%。

在全球范围内,恶劣的气候和极端天气状况是导致流离失所问题的主要因素:2012年,共有3240万人被迫离开家园,其中98%是受到上述灾害的影响。

延伸阅读:中国面临洪水危机——德巴拉蒂•古哈-萨皮尔访谈

报告称,同一时期内,世界上导致流离失所人数最多的两次自然灾害也发生在中国境内。2010年季风异常造成的洪水使1520万人失去家园,2008年四川地震则使1500万人无家可归。

近期中国自然灾害依然频发,2012年夏季连降暴雨,打破了多个极端气象纪录。其中最严重的是去年8月的台风海葵,仅浙江一省就有4400个家庭受灾,中国东部共有200多万人流离失所。

中国的官方数据与最新统计结果一致。民政部和国家减灾委员会称,2012年气象灾害影响到31省2.9亿人口,直接经济损失4180亿元(680亿美元)。减灾委表示,极端天气使90.6万所住宅被毁,146万所住宅受到严重影响,其中贫困地区受灾情况尤为严重。

境内流离失所监控中心认为,随着人口不断增长,城市化进程加快,气候变化引起的洪水、暴雨等极端天气日趋频繁、破坏性加大,流离失所问题将更加严峻。监控中心还指出,气象灾害导致的死亡人数虽有所下降,但被迫离乡的幸存者将越来越多。

监控中心敦促各国政府采取措施保护易受灾人群。报告指出:“流离失所问题能否得到改善,在很大程度上取决于政府及社区是否加强了灾害预防措施、能否有效应对新的状况。”

延伸阅读:签订新条约能帮助数百万气候移民吗?

报告发布的同时,经济学家、气候变化问题专家斯特恩勋爵针对全球变暖可能引起的流离失所提出警告。他在接受《卫报》采访时说:“如果气温增幅达到那个水平(5℃),天气变化将无规律可循,沙漠面积会进一步扩大,数亿人会面临颗粒无收、牲畜死亡的境况,他们将不得不背井离乡。”

“但是,移民也会遇到新的问题。他们会与原住民发生武装冲突。而且,这不会是偶发事件,而将成为世界各地的常态。”降,沙丁鱼和鳀鱼等小型鱼类数目大幅上涨。